Remove Stress

Tanav Se Kaise Nikale. मानसिक तनाव में क्या करें।

मानसिक तनाव मिले तो क्या करें। मानव जीवन तनाव से अछूता रहे ऐसा संभव नहीं। प्रतिदिन ही हम नए तनाव जीवन में पाते हैं।
कुछ तनाव परिस्थतिजन्य होते हैं तो कुछ भावजन्य। Tanav Se Kaise Nikale

प्रत्येक विचार एक शक्ति है। उस शक्ति का हम सदुपयोग भी कर सकते हैं और दुरूपयोग भी। Tanav Se Kaise Nikale
कोई व्यक्ति या कोई विचार हमें कितनी चिंता में डाल सकता है ये स्वयं हमपर निर्भर है।
यदि हम अडिग रहे तो नकारात्मक विचार या घटना हम पर उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाएंगे।

मानसिक तनाव व प्रभाव

कुछ तनाव हमे दूसरों से मिलते हैं और कुछ तनाव हम खुद से ही खुद को दे देते हैं।
सभी प्रकार की सूरत में तनाव तो मिल ही जाता है।
कभी तनाव कई सारे होते हैं और कभी कम होते हैं।
ऐसे में एक चिंताग्रस्त व्यक्ति का खुद को संभालना इतना सहज नहीं होता।

मानसिक तनाव जब स्वयं से मिले – Tanav Se Kaise Nikale

बहुधा ऐसा होता है कि हम अपने ही विचारों का जाल इतना बड़ा कर लेते हैं कि खुद ही उसमे फँस जाते हैं।
क्यूंकि विचार करते करते जब हम किसी बात को लेके चिंता करते हैं तो उससे सम्बंधित बातें ही सोचते रहते हैं।
इस तरह से एक नकारात्मक विचार अपना जाल बड़ा करने लगता है और हम चिंताग्रस्त हो जाते हैं।

Tanav Se Kaise Nikale

तनाव जब हमे दूसरों से मिलता है। Tanav Se Kaise Nikale

दूसरों से तनाव मिलने में अधिकतर वजह हमारी उनसे अपेक्षाएं ही रहती हैं।
अपेक्षाएं कम होती नहीं और तनाव मिलना कम होता नहीं क्यूंकि सामने वाले
का आचरण वो ही पहले जैसा ही होता है।

सम्बन्ध के प्रकार – Tanav Se Kaise Nikale


यहाँ दूसरे को समझना आवश्यक है। ये दूसरा तीन प्रकार के होते हैं।
1. अपिरिचित – जब किसी अपिरिचित से किसी वजह से तनाव मिलता है तो सामान्यतः वो अधिक देर तक नहीं रहता।
2. कोई जाना पहचाना – किसी जाने पहचाने से मिला तनाव दिक्कत देता है लेकिन चूँकि वो निकटतम नहीं है यानी हमारा
उससे कभी कभार ही मिलना होता है तो वो तनाव भी बहुत समय तक या ज्यादा बार नहीं मिलता।
3. किसी ख़ास से या बहुत ही निकटतम व्यक्ति से – ये जो दूसरे का प्रकार है यही सबसे अधिक दिक्कत देता है।
यदि इससेउबर सकें, इसका सामना कर सकें तो फिर बाकी दोनों तनाव, तनाव जैसे नहीं लगते हैं।

अपेक्षाएं – चिंता का मुख्य कारण

जो हमारे निकटतम है वो यदि हमारी अपेक्षाएं नहीं समझ रहा तो अलग बात है। परन्तु यदि वो बार बार हमें तनाव दे रहा है
यानी हमारी अपेक्षाओं को तो समझ रहा है लेकिन उसके अनुरूप आचरण नहीं कर रहा है। यहीं से अंतर्द्वंद शुरू होता है।
जो आशा कर रहा है वो मजबूर हो जाता है ये सोचने पर की आखिर उससे गलत कहाँ हो रहा है।
क्यों उसके करीब रहना वाला व्यक्ति उसे उन्ही बातों पर बार बार दुःख दे रहा है।
ये तनाव और बढ़ता है जब पहला व्यक्ति ये सोचता है की मैंने तो हमेशा ही उसकी अपेक्षाएं रखीं।

अपेक्षा का परिणाम


फिर ऐसा क्यों हो रहा है ?
यही विचार धीरे धीरे उसे खाता चला जाता है। साथ ही प्रतिदिन का तनाव मिलना तो जारी ही है।
अब एक तरफ तो जो दुःख उसे मिल रहा है और दूसरी तरफ उस दुःख के पीछे उसे कोई वजह समझ नहीं आती इसका दुःख।
यही दोतरफा तनाव उसे तोड़ने लगता है। वो अपना कार्य सही से नहीं कर पाता, कार्य करने के दौरान सही तरह से निर्णय नहीं ले पाता।

अवसादग्रस्त चित्त


हर समय ही उसका चित्त तनावग्रस्त रहता है और धीरे धीरे ये तनाव उसे और गहरे अवसाद में ले जाने लगता है।
इस तनाव का प्रभाव उसके दिन में ही नहीं रात्रि पर भी पड़ने लगता है और उसे नींद भी ठीक से नहीं आती।
स्वभाव दिनबदिन चिड़चिड़ा होता जाता है।
दूसरों से भी मिलने में, बात करने में और सबसे महत्वपूर्ण उन्हें राय देने में वो असहज सा रहता है।
अब उसके स्वभाव में आशंका भी व्याप्त होने लगती है।
ऐसे में उसे क्या करना चाहिए।

मानसिक तनाव

चिंता का समाधान

1.सबसे पहले तो ये करना चाहिए की खुद से ही पूछना चाहिए –
क्या उसे मालूम है की हकीकत में वो अपने भावों के प्रति समर्पित है। ये उसके भाव ही हैं जिनके कारण उसे
अपने निकटतम व्यक्ति से दुःख मिल रहा है क्यूंकि उसके उन भावों का तादात्म उस निकटतम व्यक्ति से है।
यदि वो थोड़ी देर स्वयं को दे और इसका अनुभव कर सके तो स्वयं पायेगा की उसका तनाव कम हो रहा है।

2. दूसरा उसे ये सोचना चाहिए की आखिर कब तक वो तनाव में डूबता रहेगा। उसे कोई निकालने नहीं आएगा क्यूंकि
अधिकतर तो लोगों को पता ही नहीं चल पाता की अमुक व्यक्ति इतने तनाव में है और उस पर हर व्यक्ति स्वयं
ही अपनी परेशानियां लिए बैठा है।

मानसिक तनाव

3. उसे सोचना ही होगा की आखिर इसका समाधान क्या है ? और इसका समाधान है इस बात को समय पर ही छोड़ दे।
अधिक अपेक्षा ही जीवन में परेशानी का कारण बनती है इसलिए किसी से भी अधिक अपेक्षा न रखें।

4. उसे सामने वाले की भी स्थिति परिस्थति के बारें में सोचना चाहिए।
कई बार होता है कि अनजाने में ही हमे कोई ठेस लगा देता है और हम उसे कुसूरवार मान लेते हैं।
यदि जानकर दे रहा है तो भी उसकी साइकोलॉजी समझनी चाहिए और उपेक्षा कर देनी चाहिए।

5. सबसे महत्वपूर्ण की समय के बारें में सोचें। जीवन में हर चीज़ समय पर ही उचित लगती है।
इस तरह से वो अपना कितना समय बर्बाद कर रहा है । कहते है ना

इसलिए जो हुआ सो हुआ, अब उसे और समय और भावनाएं ख़राब नहीं करनी है।
ये सोचकर हर दिन एक नया दिन है इस तरह से अपने जीवन के हर दिन की
शुरुआत करनी चाहिए।

Author photo

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *