
Tanav Dur Karene Ke Upaay। Anxiety से कैसे बचें।
Tanav Dur Karene Ke Upaay. जीवन की आपाधापी में हम इतने व्यस्त रहते हैं कि
स्वयं के विचार तंत्र अथार्त मस्तिष्क के लिए समय ही नहीं निकाल पाते।
विचारों में घिरे घिरे हम ये भूल जाते हैं की कैसे इन विचारों के जाल से निकलना है।
एक सकारात्मक व् आनंदपूर्ण जीवन जीने के लिए हमें सबसे पहले अपने विचारों को ठीक रखना होता है।
यदि चिंता,तनाव में हमारा मन लगा रहा तो ये संभव नहीं है। इसलिए तनाव भरे विचारों से कैसे निकला जाये,
ये हमे मालूम होना अत्यंत आवश्यक है।
Table of Contents
विचारों के प्रति जागरूक होना (Tanav Dur Karene Ke Upaay)
जब तक हम विचारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, हमे ये पता ही नहीं चलेगा कि
कौन से विचार हानिकारक हैं और कौन से लाभदायक।
जिन विचारों से मन की सहजता भंग होती है, उन्हें पहचानकर ही उनसे दूरी बनायीं जा सकती है।
तनाव (Tanav Dur Karene Ke Upaay)
तनाव हमारे जीवन में हमे सुचारु रूप से काम नहीं करने देता ।
तनाव से भरा व्यक्ति और तनाव से मुक्त व्यक्ति दोनों के कार्यों के परिणाम बहुत भिन्न होते हैं ।
तनाव से भरा चित्त और भी उसी तरह की नकारात्मक बातों से भरने लगता है और यदि समय रहते,
हम उस चिंता से नहीं निकलें तो वो अवसाद का रूप लेने लगता है I तनाव दूर करने के उपाय में
सबसे बड़ा उपाय तनाव जहाँ से आ रहा है, जिस बात से उत्पन्न हुआ है उसे समझना आवश्यक है ।

तनाव का कारण (Tanav Dur Karene Ke Upaay)
तनाव जब भी हमे होता है उसका सबसे बड़ा कारण हमारा हमारे विचारों के प्रति गहरा जुड़ाव होता है।
हमारे विचार हमारी भावनाओं से निकलते हैं I हम अपनी जिस भावना से जितना जुड़े रहते हैं उतना ही
ही हम उसके प्रति उठने वाले विचारों से जुड़े रहते हैं । जब तक उस प्रवाह में अच्छा घटता रहता है हम
खुश रहते हैं, लेकिन जैसे ही उसमे बाधा आने लगती है, हम तनावग्रस्त हो जाते हैं ।
समाधान
ऐसे में हमे विचारों के प्रति जागरूक होना बहुत जरुरी है ।
एक नकारात्मक विचार सिर्फ विचार नहीं है वो अन्य आने वाले नकारात्मक विचारों की श्रृंखला का आरम्भ है ।
हम यदि स्वयं को ये आभास दिला पाते हैं की हम जो सोच रहे हैं, वो कोई नकारात्मक विचार है,
तो हम उस श्रृंखला को शुरू होते ही रोक देंगे ।

ध्यान / विचारों के प्रति तठस्तता
ध्यान के प्रति बहुत सी भ्रांतियां जनमानस में हैं परन्तु उसका सीधा अर्थ सिर्फ इतना है
की ऐसी विधि जिससे हम विचारों के प्रति तठस्त रह सकें ।

ध्यान की विधियां
ऐसी बहुत सी विधियां हैं
जिनमे कुछ प्रमुख विधियां हैं :
- साँसों के प्रति जागरूक होना अथार्त सांस जैसे भी आ जा रही है उसका अवलोकन करना ।
- साक्षी भाव अथार्त जो भी आस पास घट रहा है उसे तठस्त भाव से देखें, कोई प्रतिक्रिया न दें ।
- किसी ख़ास वस्तु या बिंदु पर ध्यान एकाग्र करना ।
- कोई शान्तिपूर्ण संगीत सुनना ।
- नृत्य करना इस तरह से जिसमे या तो आप डूब जाएँ या फिर उसके उपरान्त इतने थक जाएँ की विचार ही न रहें ।
इनमे से कोई भी विधि जिसे आप आराम से कर सकें, उसे अपना लें एवं प्रतिदिन कुछ समय का हिस्सा बना लें।
आप निश्चित रूप से पाएंगे की तनाव अथवा नकारात्मक विचार आने रुक जाएंगे
और यदि पहले से आ रहे हैं तो कम होने लगेंगे और धीरे धीरे समाप्त हो जायेंगे ।निष्कर्ष
जैसे जैसे हम अपने मन और उसकी गतिविधियों के प्रति जागरूक होते जाएंगे,वैसे वैसे तनाव को आसानी से रोक पाएंगे।
किसी भी तरह की घबराहट, बेचैनी मुख्यतः मन में नकारात्मक विचारों की पैठ के कारण होती है।
अतः ये आवश्यक है की विचारों पर हमारा नियंत्रण होना चाहिए। ध्यान से हम विचारों को न सिर्फ कम कर सकते हैं बल्कि
शुभ विचारों का आवाहन भी कर सकते हैं।
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