
Sankalp Bal Kya Hai । Negative Thinking कैसे रोकें । संकल्प बल के 9 फायदे
Sankalp Bal Kya Hai. नकारात्मक विचार कैसे हमारे संकल्प बल से समाप्त होते हैं , आइये जानें। ये भी जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि संकल्प बल का प्रभाव कितना व्यापक है।
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारी उम्र कितनी है , हम क्या करते हैं।
एक बात तय है कि नकारात्मकता से दो चार हम रोज़ ही होते हैं।
कभी किसी घटना या कभी किसी विचार के रूप में।
विचार के रूप में ही अधिकतर प्रभावित होते हैं।
जब भी चिंता घेरने लगती है अक्सर हम अपने साथी अपने संकल्प बल को ही याद नहीं करते।
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संकल्प बल क्या है ? (Sankalp Bal Kya Hai)

संकल्प बल को हम आत्मिक बल कह सकते हैं और हमारा आस्तित्व
ही इसकी बुनियाद है।
इसे ऐसे समझें कि आत्मा विचार नहीं करती बल्कि संकल्प करती है।
अथार्त साधारण शब्दों में कह सकते हैं कि आत्मा का विचार है संकल्प।
ये हमारा मन है जो विचार करता है।
इच्छाशक्ति और संकल्प बल में अंतर
संकल्प बल हमारा स्वयं का बल है और इच्छा शक्ति हमारे मन कि शक्ति है।
मन हमारे ऊपर नहीं है, हमारे भौतिक आस्तित्व का एक हिस्सा है।
अतः इच्छा शक्ति तो हमारे संकल्प बल का हिस्सा है लेकिन संकल्प बल सिर्फ इच्छा शक्ति नहीं है।
विचार व् द्वन्द
विचार मन से निकलते हैं और हमेशा ही प्रभावित करते हैं।
रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में आदमी मन के इतना अधीन हो जाता है।
की हर समय उसके मस्तिष्क में अनेकों विचारत आते रहते हैं।
एक विचार जाता नहीं की दूसरा आ जाता है।
इन विचारों में अधिकतर नकारात्मक विचार होते हैं जो मन की द्वन्दता को
बढ़ाते रहते हैं।
इसी द्वन्द में फंसकर व्यक्ति अवसादग्रस्त होने लगता है। वह भूल जाता है
की आत्मिक बल भी उसके पास है और मन भी उसी आत्मिक बल के अधीन है।
इसी आत्मिक बल का नाम है संकल्प बल।

संकल्प बल का प्रभाव (Sankalp Bal Kya Hai)
संकल्प बल का प्रभाव बहुत ही व्यापक है साथ ही ये तुरंत असर दिखाता है।
जितनी भी गहरे से गहरे निराशा हो या मन जितना भी अवसादग्रस्त हो, संकल्प बल का
स्मरण करते ही उन्हें क्षीण करने लगता है।
हमारे अंदर वो सारी शक्तियां हैं जिनसे हम अपनी समस्या का खुद ही समाधान कर सकते हैं।
हम नाहक ही छोटी बातों को बड़ी बड़ी चिंता बनाकर और उसकी परिकल्पना में भय को
रखकर अपने भविष्य और वर्तमान दोनों को दुखद बना लेते हैं।
जितना हम चिंता को करेंगे उतना ही चिंतन से दूर जायेंगे।
जितना हम समस्या को सोचेंगे, समाधान और कठिन लगने लगेगा।
चिंताएं एक ऐसा अँधेरा हैं जो निरंतर बढ़ती रहती है जब तक की हम संकल्प बल
नाम का दिया न जलाएं।
एक बार दिए के जलने पर उसके प्रकाश के सामने बड़ा से बड़ा अँधेरा भी नहीं ठहर सकता।

संकल्प बल कैसे बढ़ाएं Sankalp Bal Kya Hai)
ध्यान
मन एक कमरा हैं जिसमे औसतन 6०००० विचार प्रतिदिन आते हैं और ध्यान वो झाड़ू
के सामान हैं जिससे उस कचरे को हम बाहर निकालते हैं । ध्यान न सिर्फ मस्तिष्क को
स्वच्छ करता हैं बल्कि मस्तिष्क को मज़बूत भी बनाता है।
इसके साथ ही ध्यान चूँकि आत्मिक स्मरण का ही एक नाम है अतः संकल्प बल
को भी शक्तिशाली बनाता है। ध्यान स्वयं के स्मरण का ही नाम है।
थोड़ी देर शांत बैठके यदि हम ये बार बार स्वयं को बताएं की हमारा स्वरुप
शरीर,विचार,मन,बुद्धि नहीं बल्कि आत्मा है तो हमारा स्वयं से तादात्म हो जाता है।
स्वयं से तादात्म को ही ध्यान कहते हैं।

स्मरण
संकल्प बल को बढ़ाने का सबसे बड़ा उपाय है संकल्प का निरंतर स्मरण।
ये भान, ये ज्ञान की हमारा आस्तित्व मन नहीं है उससे कहीं अलग
और श्रेष्ठ है। जब तक हम मन को ही सबकुछ मानते रहेंगे,
तब तक मन और विचारों के अधीन रहेंगे, परिणामस्वरूप, दुखित रहेंगे।
जैसे ही हम स्वयं का स्वरुप मैं से भिन्न मानते हैं और हम आत्मा हैं इसका
अनुभव करते हैं संकल्प बल बढ़ने लगता हैं।
संकल्प बल के 9 फायदे (Sankalp Bal Kya Hai)
- संकल्प बल हमे आत्मनिर्भर बनाता है। हमे कभी किसी के सहारे की आवशयकता नहीं होती, ना ही हम कोई सहारा तलाशते हैं।
- सही मायने में हम स्व सकारात्मक हो पाते हैं।
- संकल्प बल हमे सही निर्णय लेने ,में भी मदद करता है।
- संकल्प बल से हम हर समय ऊर्जान्वित महसूस करते हैं।
- संकल्प बल हममे साहस भरता है किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना करने के लिए।
- संकल्प बल हमारी भावनाओं को भी सकारात्मकता देता हैं।
- संकल्प बल से हमारे अंदर नकारात्मक गुण जैसे संताप,ग्लानि,ईर्ष्या इत्यादि कम होते हैं।
- संकल्प बल हममे आत्मिक गुण जैसे दया, क्षमा, करुणा इत्यादि बढ़ाता है।
- संकल्प बल होने से ही हम दूसरों में भी सकारात्मकता जगाने में सक्षम होते हैं।
निष्कर्ष
उपरोक्त बातों से ये स्पष्ट हो जाता है की हम कैसे संकल्प बल के स्मरण मात्र से
नकारात्मक विचारों से दूर होने लगते हैं।
अतः जीवन में हम कितना भी व्यस्त हों। कैसी भी परिस्थितयाँ हों, हमे अपने संकल्प बल का नित्य स्मरण करना चाहिए।
हमे ये सुनिश्चित करना चाहिए कि हमे उसे स्मरण ही न करना पड़े, वो सदैव हमारे साथ एक सच्चे मित्र कि तरह रहे।
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