
सफल व्यक्तित्व के लक्षण। Sakaratmak Kaise Rahen।
ये प्रश्न स्वाभाविक है Sakaratmak Kaise Rahen.
सकारात्मक रखने के लिए सबसे पहले हमे ये जानना होगा कि
कौन सी चीज़ें हमे उत्साहित करती हैं और किनसे हम निरुत्साहित होते हैं।
यदि हमें स्वयं का ख्याल रखना है तो सबसे अधिक आवश्यक है स्वयं
के मन का ख्याल रखें। मन जितना सकरात्मकता से भरा रहेगा, हर समय
खिला रहेगा। सफल व्यक्ति होने की प्राथमिक शर्त ही यही है कि व्यक्ति को सकारात्मक होना पड़ेगा।
एक सकारात्मक व्यक्ति सही अर्थों में एक सफल व्यक्ति है।
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मन और समय
हमारा मन जो भी सोच रहा है उसे ये भी भान रखना होगा कि समय भी जा रहा है।
अक्सर हम सोचते समय ये भूल जाते हैं कि क्या हम जो सोच रहे हैं, वो सार्थक है।
क्या उससे हम अपने समय के साथ न्याय कर रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी
नकारात्मक विचार को सोचते सोचते हमने 1 घंटा लगा दिया। इसके बाद भी हम
उससे निकल नहीं पाए बल्कि अब उसी से जुड़े नकारात्मक भाव में, किसी अनजानी आशंका
में घिर चुके हैं। अतः अपने विचारों के प्रति सजग रहना जरुरी है।
दूसरों के विचार
हम क्या सोच रहे हैं उसके साथ क्या सुन रहे हैं, उसका ध्यान रखना भी जरुरी है।
अपने मन को हम एक गमले के समान रखें, जिसमे नित्य नए फूल सुवासित रहें।
लेकिन मन को हम एक कूड़ाघर न बनायें, जिसमे कोई भी अपनी ओछी या
नकारात्मक बातें डाल दे। ये हम पर ही निर्भर है कि किस तरह के विचार
हम अपने मन में जाने दे रहे हैं।
मनन Sakaratmak Kaise Rahen
विचारों का आना अथवा किसी से सुनना अलग बात है परन्तु उन पर मनन अलग बात है।
मनन हम उसी विचार पर करते हैं जिन्हे अपना लेते हैं। मनन हमे उन्ही बातों का करना है
जो सार्थक हों। जिनसे हमे कुछ सीखने को मिले,प्रेरणा मिले। जिनसे हमारे
समय का सदुपयोग हो।

ऊर्जा का ऊर्ध्वीकरण
किसी नकारात्मक परिस्थति में हमेशा स्मरण रखें
”मेरी ताकत सही दिशा में जा रही है अथवा गलत ”
आप पाएंगे अचानक ही मन सावधान हो गया। अक्सर हम अपनी ऊर्जा नकारात्मक दिशा में लगा देते हैं।
किसी के प्रति गुस्सा आया या किसी बात पर मन में चिड़चिड़ाहट आ गयी, दोनों ही स्थति में
ऊर्जा उठी। अब ये हम पर है कि हम उस ऊर्जा को सही दिशा में, अपने कार्य में लगा रहे हैं अथवा
गलत दिशा में लगाकर अपनी हानि कर रहे हैं।

सकारात्मकता एवं स्व सकारात्मकता
बहुधा हम सुनते हैं कि सकारात्मक और स्व सकारात्मक व्यक्ति में अंतर होता है। हमें सकारात्मक नहीं स्व सकारात्मक बनना चाहिए।
मेरा मानना है कि यदि हम गौर करें एक वास्तव में एक सकारात्मक व्यक्ति सकारात्मक तभी कहलाता है जब वो
स्व सकारात्मक हो। कारण कि ऐसी सकारात्मकता किस काम की जो कुछ समय बाद न रहे। अतः एक सकारात्मक व्यक्ति
स्वाभाविक रूप से स्व सकारात्मक रहता है।
लक्ष्य रखें (Sakaratmak Kaise Rahen)
सकारात्मक व्यक्ति सदैव अपने लिए एक लक्ष्य रखता है और उसे पूरा करने में लगा रहता है।
इस तरह से स्वाभाविक रूप से ही उसके पास समय नहीं होता बेकार की बातों के लिए।
योजना
जब भी हम कोई लक्ष्य बनाते हैं तो उसे हासिल करने के लिए योजनाएं भी बनाते हैं।
सकारात्मक व्यक्ति हमेशा अपनी योजनाओं में आने वाली खामियों के प्रति सचेत रहता है।
वो अपनी योजना को मूर्त रूप देने के लिए उसमे नित नए संशोधन का प्रयास करता रहता है।

प्लान बी (Sakaratmak Kaise Rahen)
एक सकारात्मक व्यक्ति छोटी छोटी असफलताओं से घबराता नहीं है। किसी कार्य में असफल होने पर
निराशा या उदासी में डूब नहीं जाना है। एक सकारात्मक व्यक्तित्व न सिर्फ अपनी विफलता कि समीक्षा करता है,
अपनी योजनाओं में आवश्यक संशोधन करता है बल्कि जरुरत पड़ने पर अपने लक्ष्य को थोड़ा बदल भी सकता है।
कई ऐसे लोगों के उदाहरण हमे हमारे समाज में मिल जायेंगे जो बनना कुछ चाहते थे, बन कुछ गए।
और ऐसे उदाहरण हमें हर क्षेत्र में मिलेंगे।
वो अपनी मेहनत में कमी नहीं रखता, स्वयं कि ताकत को टूटने देने के बजाय उसी ऊर्जा को दोगुना करके
अपने निर्धारित लक्ष्य में लगाता है।
स्वयं का आंकलन (Sakaratmak Kaise Rahen)
वो अपने बढ़ते रहने कि रफ़्तार को भी ध्यान में रखता है। उसके सामर्थ्य के अनुसार यदि उसका कार्य जल्दी
हो सकता था तो देर में क्यों हुआ। वो उसकी पुनरावृत्ति नहीं होने देता। इस तरह से स्वयं का आंकलन करते हुए
स्वयं को सकारात्मक रखता है।
आत्मविश्वास
एक सकारात्मक व्यक्ति आत्मविश्वास से भरा हुआ होता है। उसे पता होता है कि राह में कठिनाईयां तो आएँगी ही।
वो अपनी मुश्किलों को बाधा नहीं समझता अपितु ये मानता है कि वो सही राह पर चल रहा है। उसे बस डिगना नहीं है।
उपलब्धि पर जश्न (Sakaratmak Kaise Rahen)
सकारात्मक व्यक्ति अपनी उपलब्धि पर खुश भी होता है,जश्न भी मनाता है।
लेकिन वो उसमे ही डूब नहीं जाता। वो सबको बार बार बताकर ताली नहीं चाहता।
सकारात्मक व्यक्ति कभी भी अपना बखान नहीं करेगा उसे पता होता है।
”Action Speak louder than words.”
जो उसने प्राप्त कर लिया, अब उसे उसके आगे जाना है। उसे पता होता है कि मंज़िल
अभी दूर है। यदि वो अभी ही थोड़ी सी सफलता पर ख़ुशी मनाने लगा तो हो सकता है अपने लक्ष्य
तक आसानी से न पहुंचे अथवा लक्ष्य हासिल करने में देर हो जाए।
लगातार प्रयासरत रहना (Sakaratmak Kaise Rahen)
सकारात्मक व्यक्ति अपने आप को खाली नहीं रखता। हमेशा कुछ न कुछ करने,सीखने के प्रयास में रहता है।
सबसे बड़ी बात कि लक्ष्य जब उसके पास नहीं होता तब भी वो हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठता बल्कि अपने
लक्ष्य को पाने का प्रयास करता रहता है।

सकारात्मक विचार/सकारात्मक दृष्टिकोण
सकारात्मक विचार बिना सकरात्मक दृष्टिकोण के सदैव अपूर्ण हैं। यदि नजरिया सही नहीं है तो अच्छे विचार
आएंगे, कुछ देर टिकेंगे फिर चले जाएंगे। व्यक्ति को यही लगेगा कि ये क्या हुआ अभी तो बड़ा अच्छा अनुभव
हो रहा था अचानक नकारात्मकता कहाँ से आ गयी।
परन्तु यदि दृष्टिकोण सकारात्मक हो गया तो व्यक्ति हर चीज़,हर घटना में से सकारात्मक सन्देश निकाल लेगा।
दूसरे को प्रोत्साहित करना
सकारात्मक व्यक्ति कभी किसी को हीन भावना से ग्रसित नहीं करेगा। उसका मन ही नहीं करेगा।
यदि कोई उसे नीचा दिखाने का प्रयास करेगा तो वो खुद भी हीन भावना नहीं अपनाएगा।
सकारात्मक व्यक्तित्व से भरे लोग सारे जगत को बढ़ता देखना चाहते हैं। सकारात्मक व्यक्ति
सदैव दूसरों का उत्साह बढ़ाएगा,उन्हें प्रोत्साहित करेगा।
नियमित दिनचर्या व अनुशासन (Sakaratmak Kaise Rahen)
सकारात्मक व्यक्ति एक दिनचर्या के अनुसार जीता है परन्तु उस अनुशासन को वो थोपा हुआ नहीं मानता।
वो अपनी दिनचर्या में भी एक उमंग में रहता है। वो जानता है कि उसके पास प्रतिदिन २४ घंटे ही हैं और एक
नियमित दिनचर्या का पालन करते हुए ही वो अपने लक्ष्य कि तरफ अग्रसरित रह सकेगा।
व्यायाम/योग/ध्यान
सकारात्मक व्यक्ति स्वयं के शरीर के लिए नियमित ही कुछ व्यायाम करता है। इसके साथ ही मन को सम्यक
रखने हेतु वो योगासन में बैठता है और ध्यान के लिए भी कुछ समय देता है।
समय का भान
सकारात्मक व्यक्ति को हर समय अपने समय का ध्यान रहता है। वो उसे स्वयं को याद नहीं दिलाना पड़ता बल्कि
इसका भान उसे बना ही रहता है। इसलिए किसी भी कार्य को करने हेतु सबसे पहले उसका मस्तिष्क एक अनुमानित
समय निकाल लेता है। अब उसे पाता है कि अमुक कार्य को एक निश्चित समय सीमा के अंदर ही उसे करना है।
कोलाहल से दूर
एक सकारात्मक व्यक्ति अपने आप को हमेशा कोलाहल से दूर रखता है। सिर्फ समय बचाने के लिए नहीं बल्कि
इसलिए कि उसे व्यर्थ कि बातचीत या किसी कि निंदा सुनना ही पसंद नहीं होता। यही नहीं वो ज़बरन अपने आप
को भीड़ का हिस्सा नहीं बनाना चाहता। यदि कहीं कुछ सार्थक उसे लगता है तो वो अवश्य हिस्सा बनता है।
रचनात्मक
रचनात्मकता हमारे मन मस्तिष्क को न सिर्फ राहत देती है, उन्हें तरोताज़ा भी करती है।
एक सकारात्मक व्यक्तित्व हमेशा ही अपना कुछ समय रचनात्मकता में लगाएगा।
इस तरह से उसे अपने कार्य को और अच्छी तरह से करने में मदद मिलती है।
चाहे वो लेखन,काव्य,गीत,गायन,वाद्य,नृत्य कुछ भी हो लेकिन वो अपनी उस कला
को कुछ समय जरूर देता है।
लक्ष्य के बाद लक्ष्य (Sakaratmak Kaise Rahen)
अपना लक्ष्य प्राप्त करने के बाद वो कुछ समय स्वयं को देता है। लेकिन इस उहापोह में,असमंजस में नहीं रहता
कि अब उसे क्या करना है। उसे तो जो हासिल करना था उसने कर लिया। एक स्व सकारात्मक व्यक्ति सदैव
लक्ष्यप्रधान होगा। उसे अच्छी तरह से ज्ञात होता है कि यदि अपने दिन,अपने समय,अपने जीवन का सही तरह से
लाभ लेना है तो एक न एक लक्ष्य उसे अपने सामने रखना ही होगा। अतः दूसरा लक्ष्य तो वो पहले लक्ष्य को हासिल
करने के दौरान ही बना चूका होता है। पहला पूरा करने के बाद शीघ्र ही वो दूसरे लक्ष्य में लग जाता है।
निष्कर्ष
उपरोक्त बातों से ये विदित हो जाता है की यदि संयम,मन पर नियंत्रण व एक लक्ष्य रखकर व्यक्ति कार्य करें,
साथ हीअपनी ऊर्जा को नकारात्मक परिस्थतियों में भी सकारात्मक दिशा में लगाए रखे
तो सफलता प्राप्त करने में उसे कोई नहीं रोक सकता।
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