
Khush Rahne Ke Upaay । खुश रहने के 6 उपाय ।
Khush Rahne Ke Upaay. खुश रहने के उपाय की जब बात चलती है तो सबसे पहले ये गौर करना ज़रूरी है की आखिर दुखी
क्यों होते हैं हम।
Khush Rahne Ke Upaay । खुश रहने के 6 उपाय । ये बात देखने में तो बहुत अलग नहीं लगती लेकिन हकीकत में बिलकुल ही अलग है।
इस पोस्ट में हम उन्ही बातों को समझने के एक प्रयास करेंगे।
Khush Rahne Ke Upaay

खुश रहना और दुखी न होना, दोनों में अंतर क्या है। Khush Rahne Ke Upaay
दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। एक यदि उजाले की बातें हैं तो एक अँधेरे की।
आप एक साथ खुश और दुखी दोनों नहीं रह सकते जैसे की अन्धकार और
प्रकाश एक साथ नहीं रहते।
खुश जब हम होते हैं तो एक उत्साह, एक उमंग सी हममे होती है।
अंतर – Khush Rahne Ke Upaay
पता ही नहीं चलता की समय कितनी जल्दी बीत रहा होता है।
हम किसी भी काम को एक उत्साह, एक ऊर्जा के साथ करते हैं।
सबसे बड़ी बात की हमारे पास दुःख की तरफ सोचने तक का समय नहीं रहता।
दुःख की तरफ मन ही नहीं जाता क्यूंकि हम व्यस्त रहते हैं अपने कार्य में।
या फिर आगे बढ़ने की योजनाओं में, उनके क्रियान्वन में।
लेकिन अचानक ऐसा होता है कोई घटना घटती है चाहे मानसिक तल पर या
निजी जीवन में की हम ठहर से जाते हैं। उस घटना के घटने का कारण चाहे कोई भी
रहा हो परन्तु हम अचानक ही अपने आप को दुःख से घिरा हुआ पाते हैं।
ऐसे में यदि हममे साहस है, पर्याप्त समझदारी है, धैर्य है तब तो हम ठीक तरह से
उस परिस्थति का सामना कर पाते हैं। उससे बाहर निकल पाते हैं वरना अपने लिए
दिक्कत ही बढ़ाते चले जाते हैं।
धीरज रखें
सबसे पहले हमे जो आवश्यक है वो है धीरज अथार्त धैर्य का होना।
हमे किसी भी कीमत पर अपना धीरज नहीं खोना है। धीरज खोने
लगेंगे तो िस्थति को और बदतर बनाते चले जाएंगे।
हमे लगेगा ऐसा हो रहा है परन्तु वास्तविकता में हम ही उसमे महती
भूमिका निभा रहे होते हैं, स्वयं का धीरज खोने के कारण।
विवेक – Khush Rahne Ke Upaay
धीरज खोने पर सबसे बड़ा नुक्सान ये होता है की हमारा विवेक सही तरह से
काम नहीं करता। विवेक जो हमारे निर्णय को सही लेने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि वो ठीक से काम नहीं करे तो और भी नयी दिक्कतें आ सकती हैं।

उत्साहित रहें
खुश रहने के उपाय में उत्साहित रहना बहुत बहुत आवश्यक है। हम कोई भी काम करें, कुछ भी करें लेकिन
हमारे अंदर एक प्रकार का उत्साह होना चाहिए। यदि हम उत्साहित हैं तो हमारी शारीरिक व मानसिक ऊर्जा
किसी और ही तल से काम करती है। इससे परिणाम तो अच्छा मिलता ही है। साथ ही साथ हमे
किसी भी प्रकार की थकान पता नहीं चलती है।
उत्साहित रहने से एक उमंग सी उठी रहती है और जो किसी भी दुःख अथवा परेशानी का तुरंत ही
समाधान हमे दे देती है।
बेहतर मानसिक माहौल बनायें
स्वयं के अंदर एक वैचारिक माहौल बनायें। ऐसा मानसिक माहौल जिससे न सिर्फ आप जो करने
जा रहे हैं उसमे एक रूचि, एक उत्साह रहे बल्कि आप किसी भी तरह की नकारात्मकता से बचें रहें।
”परिस्थति बदलना हमारे हाथ में नहीं होता परन्तु मनोस्थिति हम अवश्य नियंत्रित रख सकते हैं। ”
अक्सर ऐसा होता है हम बहुत अच्छी परिस्थति में भी उतने अच्छे परिणाम नहीं दे पाते सिर्फ बेहतर
मानसिक माहौल की कमी के कारण। यदि हम अच्छी परिस्थति में ऐसा करते हैं तो जब कोई
ख़राब िस्थति होगी तो उसमे कैसा परिणाम देंगे।
इसलिए चाहे कुछ भी हो हमे ये सुनिश्चित करना ही पड़ेगा, हमे स्वयं को ये उपहार देना ही होगा
की हम सदैव सकारात्मक रहेंगे। बेहतर मानसिक माहौल का अर्थ ही सकारात्मकता यानी किसी
भी चीज़ में हम नकारात्मक न देखें। कोई भी घटना हमे एकदम से विचलित न कर पाए।

सदैव स्वयं की भावनाओं पर नज़र रखें
हमारा विचारतंत्र हमारी भावनाओं के अंतर्गत होता है। यदि हम दुःख के गाने बहुत पसंद करते हैं
तो हमारी भावनाएं बहुधा वैसी ही होंगी मतलब बहुत ज्यादा संघर्ष करना हम पसंद नहीं करेंगे।
शायद रात्रि में देर से सोना और सुबह देर से उठना पसंद हो हमे।
ठीक उसी तरह यदि हमे प्रकृति पसंद है तो हम देखेंगे ख़ुशी वाले गाने अधिक पसंद होंगे।
तात्पर्य यही की हमे ये पता होना चाहिए की दिन के अधिकाँश समय हम किस तरह के भावों
में हैं क्यूंकि भाव ही हमारे विचारों का आधार है। उसी तरह के विचारों से हम ओतप्रोत रहेंगे।
समाधान आधारित विचारधारा
अक्सर चाहे छोटी मुश्किल हो या बड़ी हम उस समस्या को समस्या की तरह ही देखते रह जाते हैं।
जब तक हम किसी समस्या का समाधान नहीं निकालेंगे वो समस्या बानी ही रहेगी।
हमे अपनी विचारधारा को समाधान आधारित रखने पर अधिक ज़ोर देना होगा।
जितना अधिक हम स्वयं को समाधान आधारित बनाएंगे उतना ही कम
अपने जीवन में समस्या पाएंगे।
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