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Hatasha Kaise Dur Kare। चिंता दूर करने के उपाय ।

क्या करें जब मन हताश हो जाए, इस प्रश्न के उत्तर कई हैं। Hatasha Kaise Dur Kare
सबसे पहले लेकिन जो जरुरी बात है वो ये की खुद को संभाला जाए।

हताशा अथवा निराशा क्यों होती है। कैसे मन बिलकुल हताश हो जाता है।
कैसे उस स्थिति-परिस्थिति में स्वयं को संभालना चाहिए। यदि हम उस समय खुद को
संभाल लें और अधिक हताशा में ना जाएँ तो बाकी का काम उतना कठिन नहीं रहता।

Hatasha Kaise Dur Kare

मनन करें की ऐसा क्यों हुआ। जिस किसी भी घटना से आप विफल हुए हैं उसकी समीक्षा करें।
समीक्षा की जब बात आती है तो वो निष्पक्ष ही होती है। यानी आप पूरी घटना को एक दृष्टा बनकर
देखें। ये देखें की ऐसा क्यों हुआ और उन वास्तविक कारणों तक पहुंचना जरुरी है जिनकी वजह से
आप में हताशा उत्पन्न हुई है। यदि उनकी सही समीक्षा, सही आकलन नहीं किया गया तो वो ही कारण
दुबारा फिर होंगे और फिर से इसी प्रकार की हताशा मिलनी संभव है।

मनन करें – ऐसा होने पर ये सोचना लाज़िमी है की हमने आखिर उससे इतनी अपेक्षा रख ही क्यों ली जिससे हममे
इतनी हताशा भर गयी। कहते हैं ना –
”आप को अपना मानने वाला कभी भी आपको दुःख नहीं देगा”
तो ये हो सकता है की उससे अनजाने में ये दुःख मिला हो आपको और आप नाहक ही इतने परेशान हो रहे हैं।
और यदि उसने जानकर ये दुःख दिया तो ये मान ले की चलो अच्छा हुआ इतने में ही मुझे समझ आ गया अन्यथा
आगे चलकर देता तो दुःख और बड़ा मिलता।

किसी घटना से (Hatasha Kaise Dur Kare)

निराशा यदि किसी घटना से मिली है तो ये अधिकतर आकस्मिक ही होता है और ये किसी के भी साथ हो सकता है।
इसलिए इस बात को लेकर भी इतनी चिंता करने की आवश्यकता नहीं। ये उसी प्रकार है की क्रिकेट के मैदान पर
कोई खिलाड़ी यदि हर बार कैच लेता है और किसी दिन उससे कोई कैच छूट जाए तो उसे नियति ही समझना चाहिए।
ये मानिये की आपने प्रयास तो किया था, सफल नहीं हो पाए तो कोई बात नहीं, प्रयास जारी रहेगा, आगे सफलता अवश्य मिलेगी।

ऐसा होने पर भी यही सोचना चाहिए की क्या मैंने पूरी तैयारी की थी। आखिर कहाँ कमी रह गयी।
उन वजहों पर विचार कर उनपर काम करना चाहिए की इसकी पुनरावृत्ति ना हो।
कुछ भी हो लेकिन अपने प्रयास और मेहनत से समझौता नहीं करना हैं।

यदि कोई विचार या भाव आपको भय दे रहा हैं तो इस बात को समझें की उस विचार या भाव ने
आपको नहीं पकड़ा बल्कि आप खुद ही उस भाव को पकडे हुए हैं। परिणामस्वरुप आपको दुःख
या भय मिल रहा हैं। यदि वो भाव अतीत से जुड़ा हैं तो ये समझें की उसमे क्या रखा है।
”जो बीत गया, सो बीत गया”
यदि भविष्य को लेके वो विचार आपको भय दे रहा हैं तो इसका आकलन करना आवश्यक हैं की
क्या सिर्फ यही विचार/भाव आपको भय दे रहा हैं या फिर ऐसा अधिकतर होता हैं।
यदि एक निश्चित भाव से ही आप सशंकित हो रहे हैं तो इस बात को गाँठ मान लीजिये :

चिंतन

बजाय चिंता में डूबने के आपको ये देखना चाहिए की मेरी शक्त।, मेरी ऊर्जा कहाँ जा रही हैं।
इस तरह से क्या मुझे ख़ुशी मिल सकती हैं ?
इस तरह से क्या मैं सफल हो पाऊंगा ?
समय इतना कीमती हैं, हाथ में रेत की तरह फिसल रहा है।
क्या आगे भी इसी तरह मैं हाथ पर हाथ रखे बैठा रहूँगा।
जाने अनजाने दुःख, जानी अनजानी चिंताओं में अपना समय बरबाद करता रहूँगा।

क्या मेरे पास कोई प्लान बी है जो मैंने इस असफलता से निपटने के लिए सोचा था।
हमेशा याद रखें की आपके पास जो सबसे बड़ा धन है और जो समय से भी कीमती है,
वो हैं स्वयं आप। जीवन में जरुरी नहीं की सभी को सभी कुछ मिल जाए।
एक दरवाज़ा बंद होता है तो 10 दरवाज़े खुलते हैं।
हो सकता है आपको इससे अच्छा मिलना था, आपके साथ इससे अच्छा होना था इसलिए ये विफलता मिली।
हो सकता है आप इससे भी बड़ी चीज़ में सफल हों।

 चिंतन  (Hatsha  Kaise  Dur  kare )
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3 thoughts on “Hatasha Kaise Dur Kare। चिंता दूर करने के उपाय ।

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