
Dhaarna Ki Shakti. Manifestation का प्रभाव
धारणा, हम जो सोचते हैं क्या उस पर गौर करते हैं। Dhaarna Ki Shakti
हम क्या सोच रहे हैं इस पर नहीं बल्कि हम सोच रहे हैं इस बात पर गौर।
ये कुछ भी मुश्किल नहीं लेकिन इससे ही असली बात निकलती है।
Dhaarna Ki Shakti. हम जानते हैं की प्रत्येक विचार
अपने आप में एक ऊर्जा है। यही विचारों की शक्ति, भावों की शक्ति ही
धारणा की शक्ति है।

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धारणा के प्रति जागरूकता – Dhaarna Ki Shakti
जिस दिन हम ये समझ जाएंगे की हमारे साथ जो हो रहा है हमारे विचारों के कारण ही
हो रहा है, उस दिन से हम अपने विचारों के प्रति बेपरवाह रहना छोड़ देंगे।
हमे उस दिन से बेवजह की चिंताओं से छुटकारा मिल जायेगा।
हमे उस दिन से लोगों से अधिक अपेक्षा रखने का मन नहीं करेगा।
हमारे अंदर वास्तविक सकारात्मकता आएगी और तब वास्तविक शांति भी।
हमारे अंदर एक ऐसा आत्मविश्वास जगेगा जो सदैव बना रहेगा।
क्यूंकि हम इस तथ्य को जानेंगे की आस्तित्व हमे वोही देता है जो हम सोचते हैं ।
धारणा का प्रभाव – Dhaarna Ki Shakti
यदि उदास हैं तो वोही भाव हम प्रकृति को भी भेजे जा रहे हैं और बदले में प्रकृति
अथार्त आस्तित्व भी हमे वोही लौटा रहा है। परिणामतः उदासी बनी ही रहती है।
यदि सकारात्मक भावों से भरे रहते हैं और ये मानते हैं की मेरे साथ अच्छा ही होगा
तो जीवन में मंगल स्वतः घटित होने लगता है।
सार ये है की वो सूक्ष्म विचारों के भाव जो हमारे अवचेतन मन तक पहुँच जाते हैं।
वो वहां एक बीज की भाति रोपित हो जाते हैं। अब वो बीज पेड़ बनेगा और जिस प्रकार
का है वैसा ही फल देगा, परिणाम देगा।
अवचेतन मन – Dhaarna Ki Shakti
जैसे हम किसी अतीत की घटना या किसी व्यक्ति विशेष को या किसी भाव को, किसी
आशंका को भूलना चाह रहे हैं तो उस प्रक्रिया में हम उसे और याद कर रहे हैं।
और अनजाने में उसे ही अवचेतन मन में भेज रहे होते हैं।
अवचेतन मन एक गोदी में रहने वाले बच्चे के समान है जिसे ये नहीं पता की क्या व्यवहार करना है।
उसे डराओगे तो डरेगा, हंसाओगे तो हंसेगा।

धारणा पर विश्वास – Dhaarna Ki Shakti
यदि हम दुःख में बैठे हैं और आशा कर रहे हैं काश सब अच्छा हो जाए तो कैसे होगा।
इसके लिए हम यदि दुःख में भी घिरे हैं तो भी हमे ये विश्वास रखना होगा की सब ठीक ही होगा।
मात्र आशा जिसके आसपास दुःख भरे भाव हैं और आत्मविश्वास भरी आशा जिसके आसपास
सकारात्मक भाव हैं, दोनों में ज़मीन आसमान का अंतर है।
धारणा
कुल मिला कर जिन भावों में हम अधिक घिरे रहेंगे, धारण किये रहेंगे वो ही धारणा बन जाते हैं।
उन्ही का सूक्ष्म अंश अवचेतन मन में चला जाता है और फिर हमारे जीवन में वैसा ही होने लगता है।
इसलिए अपनी धारणा की शक्ति को पहचानना चाहिए। उससे महत्त्वपूर्ण कुछ भी नहीं है।
जीवन में सफलता
धारणा की शक्ति को पहचानकर व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थति में भी संयम नहीं खोता।
उसे मालूम होता है की यदि वो सकारात्मक बना रहेगा तो आसानी से इस मुश्किल से निकल जायेगा।
धारणा की शक्ति से व्यक्ति अपने उद्देश्य को आसानी से प्राप्त कर सकता है।
धारणा की शक्ति व्यक्ति में संकल्प बल बढ़ाती है जिससे सकारात्मक भाव जाग्रत रहते हैं और
नकारात्मक विचार बिलकुल भी पास नहीं आते।
निष्कर्ष – Dhaarna Ki Shakti
धारणा वोही विचार हैं जिन्हे हमारा मन धारण किये हुए है। अतः इस बात के प्रति हमे बहुत सजग रहना होगा की किस
प्रकार के विचारों को हम अपने मन में ज्यादा जगह दे रहे हैं। जिन विचारों की अधिकता रहती है, अधिकांशतः
वोही विचार हमारे अवचेतन मन में जगह बनाने लगते हैं। यदि धारणा की शक्ति को हम अपने जीवन में उतार सकें
तो बड़े से बड़े उद्देश्य को भी प्राप्त कर सकते हैं।

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